मुनिया पढ़ैअन; मुनमा पढ़ैअन (वज्जिका कविता)-- Muniya Padhiayan Munama Padhaiyan ( Vajjika Poem)
मुनिया पढ़ैअन; मुनमा पढ़ैअन अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस विशेष (वज्जिका क्षेत्रीय मातृभाषा) मुनिया पढ़ैअन; मुनमा पढ़ैअन मिलजुलके इसकूल अ...
मुनिया पढ़ैअन; मुनमा पढ़ैअन अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस विशेष (वज्जिका क्षेत्रीय मातृभाषा) मुनिया पढ़ैअन; मुनमा पढ़ैअन मिलजुलके इसकूल अ...
गाँव की मिट्टी और शहर की धूल लोग कहते हैं, गाँव की मिट्टी में, जो खुशबू, प्यार और संस्कार हैं। वह शहर की धूल में कहाँ मिल पाते हैं? तो फ...
हमारे यहां तो रोज होती है होली... जब भी सुनाता हूं कविता आँखें कर लेती हैं लाल पीली..! हम समझते हैं कि अब निकलेगी कोई बात रंगीली..!! ...
चलो चलें स्नान करने कुंभ मेला चलो चलें स्नान करने कुंभ मेला प्रयाग में लगा है महाकुंभ मेला। साधु संतों, भक्त जनों का आया है पावन मेला...
अल्प मधुमास, कल्प वनवास... भाग्य में लिखा था क्यों यह बात, अल्प मधुमास, कल्प वनवास.... दो पल ठहरी मिलन की बेला, यु...
यात्राओं में तुम्हारी और ज्यादा याद आती है कारण है तुम्हारा परवाह करना पिछली बार घर जाते समय तुम साथ थे और साथ थी तुम्हारी हजार तरह...
रंग भर दो मेरे रंग भर दो मेरे कोरे कागज़ पे तुम अब तलक तक सूनी की सुनी रह गयी । रंग भर दो मेरे कोरे कागज़ पे तुम अब तलक तक सुनी की ...
दिलवर की रिहाई Dilber Ki Rihayee इंतजार, इजहार, प्यार संग, प्रीत की सारी रीत निभाई। दिल पर पत्थर रख दिलवर को, दिल की कैद से दे दी र...