Page Nav

HIDE

Grid

GRID_STYLE

Breaking News:

latest

Advertisement



Poem ( Sad ) रंग भर दो मेरे कोरे कागज़ पे तुम Rang Bhar do Mere kagaj Pe tum

रंग भर दो मेरे रंग भर दो मेरे  कोरे कागज़ पे तुम अब तलक तक सूनी की सुनी रह गयी । रंग भर दो मेरे कोरे कागज़ पे तुम अब तलक तक  सुनी की ...

Khushiji.com

रंग भर दो मेरे


रंग भर दो मेरे 

कोरे कागज़ पे तुम

अब तलक तक

सूनी की सुनी रह गयी ।

रंग भर दो मेरे

कोरे कागज़ पे तुम

अब तलक तक 

सुनी की सूनी रह गयी ।।


आके अब थाम लो

मेरे हाथों को तुम

मेरी मेहँदी

रची की रची रह गयी ।।


माँग भरने की थी

मांग कब से मेरी

मैं अभागन

बनी की बनी रह गयी

रजनीश कर्ण (नई दिल्ली)


No comments